ॐ ASTRO ABHAY JI स्पष्टता, भय नहीं।

वास्तु

गृह वास्तु

घर के प्रवेश, पूजा स्थान, रसोई, शयनकक्ष और दैनिक उपयोग क्षेत्रों की दिशा-आधारित समीक्षा।

गृह वास्तु
भय नहीं, स्पष्टता।

मार्गदर्शक विचार

घर का प्रवाह

गृह वास्तु का उद्देश्य घर को भय से नहीं, उपयोगिता और संतुलन से देखना है।

जहाँ संभव हो, सरल और व्यावहारिक सुधार प्राथमिकता होते हैं।

मुख्य प्रवेश

इस विषय को परिस्थिति, समय और व्यक्ति की वास्तविक आवश्यकता के साथ समझा जाता है।

रसोई

इस विषय को परिस्थिति, समय और व्यक्ति की वास्तविक आवश्यकता के साथ समझा जाता है।

शयनकक्ष

इस विषय को परिस्थिति, समय और व्यक्ति की वास्तविक आवश्यकता के साथ समझा जाता है।

पूजा स्थान

इस विषय को परिस्थिति, समय और व्यक्ति की वास्तविक आवश्यकता के साथ समझा जाता है।

कार्य क्षेत्र

इस विषय को परिस्थिति, समय और व्यक्ति की वास्तविक आवश्यकता के साथ समझा जाता है।

दृश्य समझ

विषय को देखने का संतुलित ढंग

नीचे के संकेत पेज के विषय को समझने में मदद करते हैं। इन्हें कठोर भविष्यवाणी नहीं, बल्कि परंपरागत संदर्भ के रूप में पढ़ना चाहिए।

मुख्य प्रवेश रसोई शयनकक्ष पूजा स्थान कार्य क्षेत्र

प्रक्रिया

परामर्श या विधि कैसे आगे बढ़ती है

हर चरण में स्पष्टता, सम्मान और व्यावहारिकता को प्राथमिकता दी जाती है।

1

आवश्यकता समझना

2

फोटो/लेआउट समीक्षा

3

दिशा आकलन

4

चर्चा

5

संतुलित सुझाव

सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या यह परिणाम की गारंटी देता है?

नहीं। मार्गदर्शन का उद्देश्य संदर्भ और स्पष्टता देना है, निश्चित परिणाम का दावा नहीं।

परामर्श से पहले क्या जानकारी चाहिए?

विषय के अनुसार जन्म विवरण, प्रश्न, फोटो/लेआउट या संस्कार की आवश्यकता पूछी जा सकती है।

क्या सुझाव व्यावहारिक होते हैं?

हाँ, प्राथमिकता सरल, संतुलित और परिस्थिति के अनुसार लागू होने वाले सुझावों को दी जाती है।